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गीत गुनगुनाएंगे

आप अपना जो हमे बनाएंगे
आपके ही गीत गुनगुनाएंगे

बेरूखी यूं ना तुम जताओ
तुमसे दूर हम ना रह पाएंगे

प्यार मे इतना तो हक देदो सनम
कुछ तो हम भी तुमहे सताएंगे

गर कभी रूठ भी गये तो सनम
तुमको फिर प्यार से मनाएंगे

प्यार मोहन से है अगर सच्चा
फिर दुसरी राह क्यू हम जाएंगे

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Mohan Bamniya
Mohan Bamniya
Panipat Haryana
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प्रणाम दोस्तों मै एक साधारण जीवनशैली का व्यक्ति हूँ ।मैं कोई बड़ा लेखक-कवि नहीं हूँ...
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