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गीत गाया पत्थरों ने

Naval Pal Parbhakar

Naval Pal Parbhakar

कविता

April 27, 2017

गीत गाया पत्थरों ने

मैं जब चला यहाँ से
मिला धोखा ही धोखा जहां से
मगर जब पहुंचा उपवन में
न था वहां पर कोई दुख संताप
चारों तरफ थे झाड़ झंखाड़
और थी चारों तरफ हरियाली
बैठ एक छोटे पत्थर पर
गुनगुनाने लगा कुछ यूँ ही मैं
मिलाया सुर सुरीली हवा से
झूम उठी सारी हरियाली
और मेरे साथ मिलकर
गीत गाया पत्थरों ने
गीत गाया पत्थरों ने ।
-:-0-:-
नवल पाल प्रभाकर

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