गीत : आओ चलो....... !

गीत:—
आओ चलो चलें हमदम
¤दिनेश एल० “जैहिंद”

आओ चलो चलें हमदम मेरे धरती के पार ।
अब महफूज नहीं हैं हम और हमारा प्यार ।।
आओ चलो चलें हमदम………………….

(1)

कदम-कदम पर बैरी खड़े हैं हमारे प्यार के ।
हम भला अब कैसे बसाएंगे घर मनुहार के ।।
प्रीत हमारी लटकी हुई है तीरो-तलवार पे ।
हम तो अब भी फँसे हुए काँटों ओ कटार पे ।।

हम सह न पाएंगे बेरहम जमाने की मार,,,,
आओ चलो चलें हमदम……………………..

(2)

वो देखो चाँद बड़ा खूबसूरत दिखता धरा से ।
बड़ी दिलकश होगी दुनिया वहाँ की यहाँ से ।।
उठ चुकी मेरी आस्था अबतो दुनिया-जहां से ।
चाँद पे नई दुनिया बसाएं फिर दिलो-जां से ।।

होंगी दिलों में हमारे वहाँ तो खुशियाँ अपार,,,,
आओ चलो चलें हमदम……………………..

(3)

जन्नत कोई कल्पना नहीं जन्नत तो वहीं है ।
असल घर हमारा चाँद है ये धरती नहीं है ।।
इन चढ़ती सीढ़ियों से वहाँ पहुँचना सही है ।
अगर महफूज हम हैं तो घर हमारा वहीं है ।।

दो बदन इक जां होगा वही अपना संसार,,,,
आओ चलो चलें हमदम……………………

===≈≈≈≈≈≈====
दिनेश एल० “जैहिंद”
17. 01. 2018

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