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गीतिका

तेरे धोखे से लगता हैं
तुझे भी दर्द दे हम भी ।
तुझे यूँ दर्द में पाकर
फिर भी रो दिए हम भी ।
भरोसा तोड़ा था तुमने
दुबारा कर लिया मैंने ।
पुरानी बीती बातों से
किनारा कर लिया मैंने ।
चलो फिर जी हीं लेंगे हम
तुम्हारे साथ को पाकर ।
नए सपने संजोकर के
तुम्हारे प्यार में खोकर।
वफ़ा ए इश्क़ रखना बस
यही फ़रियाद करती हूँ।
अपनी सारी ज़िन्दगी।
तुम्हारे नाम करती हूँ।
हमारे बीच में हैं
जो ये पाक सा रिश्ता ।
इसे नापाक ना करना
ना इसको ख़ाक तुम करना ।

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Dimpal Khari
Dimpal Khari
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