गीतिका

गीतिका-
रात- रात भर रोता रहता,मुस्काने की कोशिश में।
चेहरा मैला और हो गया ,चमकाने की कोशिश में।।1

आभारी हूँ जीवन में जो, मिला हमें है लोगों से,
लगा सदा रहता हूँ उसको,लौटाने की कोशिश में।।2

मायावी बंधन की दुनिया,मन को रहती भरमाती,
यत्न बहुत करता हूं प्यारे,समझाने की कोशिश में।।3

विज्ञ मान जिनसे था पूछा,पता लक्ष्य की राहों का,
लगे हुए थे मन के कलुषित,भटकाने की कोशिश में।।4

जिसे बनाया खून- पसीना ,बहा- बहा कर हाथों से,
लोग लगे हैं उसी सदन को, गिरवाने की कोशिश में।।5

अब पुष्प सभी संबंधों के ,गंध रहित से लगते हैं,
आओ समय बिताएं थोड़ा,महकाने की कोशिश में ।।6

साथ नहीं दे सकते हो तो ,ऐसी कोई बात नहीं,
रोड़ा मत डालो अब कोई, दीवाने की कोशिश में।।7
डाॅ बिपिन पाण्डेय

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