"गीतिका"

गीतिका –
——

ये’ जीवन विधाता का’ उपहार है |
ये’ माने वही जो समझदार है |

बुलाती हैं’ गलियाँ मे’रे देश की
विदेशी ये’ राहें कहाँ प्यार है |

बड़ा मोल अपनों का’ समझो इसे
निभाना सदा ही ये’ संसार है |

जगत के जो’ रस्ते हैं’ टेढ़े बने
न रखना सरोकार बेकार है |

सहज पथ ही’ चुनना गमन के लिए
सफर की घड़ी बस बची चार है |

मैं’ राही अकेला चला आ रहा
सँभालो विधाता ये’ मनुहार है |

मिले जब भी’ “छाया” ठहरना वहीं
समझ लो विधाता का’ आभार है |

“छाया”

Like Comment 0
Views 8

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share