गीतिका

अगर चाहता है तू खुशियाँ ,दुख तुझको सहना होगा ।
बैठे-बैठे कुछ न होगा , जतन तुझे करना होगा । ।
वज्राघात भले हो जाए , गिरे टूटकर पर्वत ऊपर ,
भूकम्पों का दौर भी आए , तुझे अडिग रहना होगा । ।
सागर उमड़े यदि पीड़ा का ,नदियाँ उल्टी बह निकलें ,
दलदल रोके मार्ग यदि तो , तुझे नहीं मुड़ना होगा ।।
तेरा चलना चलते रहना , राह दूसरों को देगा ,
केवल मानवता के पथ पर , तुझे सदा चलना होगा ।।
अवरोधक आँधी आएगी ,अगर चलेगा राह सत्य की,
तूफानों की बौछारों में , तुझे न पल हिलना होगा ।

-ईश्वर दयाल गोस्वामी।

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