Skip to content

गीतिका

sanjay giri

sanjay giri

गज़ल/गीतिका

January 13, 2017

*गीतिका *

देश हित के लिए खेलती बेटियाँ
हर कदम पर यहाँ जीतती बेटियाँ

देखिये देश में अब पदक ला रहीं
बढ़ धरा से गगन चूमती बेटियाँ

आन को मान को देश की शान को
हर मुसीबत से हैं जूझती बेटियाँ

बेटियों पर पिता को हुआ नाज़ अब
लग पिता के गले झूलती बेटियाँ

खूबसूरत सुमन सी लगे हैं सदा
बन के खुशबू यहाँ महकती बेटियाँ

घर चलो लौट कर तुम न देरी करो
राह में बस यही सोचती बेटियाँ

आप ‘संजय’ सदा नेह देना इन्हें
हाथ सर पर सदा माँगती बेटियाँ

संजय कुमार गिरि
करतार नगर दिल्ली -53
9871021856

Author
sanjay giri
Recommended Posts
कविता
"बेटियाँ" अब परिचय की मोहताज नही बेटियाँ आज माँ पिता की सरताज हैं बेटियाँ । गंगा जैसी निर्मल,अग्नि सी निश्च्छल शीतल समीर की झोंका हैं... Read more
बेटियाँ
मां की ममता है बेटियाँ । पिता की दुर्बलता है बेटियाँ । पति का पूर्णता है बेटियाँ । परिवार की रौनकता है बेटियाँ । समाज... Read more
बेटियाँ
बेटियाँ हर कोख कौम देश का अभिमान बेटियाँ कर रही हैं राष्ट्र का निर्मान बेटियाँ प्रकृति प्रदत्त प्रेम की संतान बेटियाँ प्रभू ने खुद रचा... Read more
बेटियाँ
व्यक्ति के निर्माण का आधार अपनी बेटियाँ। स्नेह,ममता,त्याग का संसार अपनी बेटियाँ।। फूल सा कोमल हृदय रखती यक़ीनन है मगर। आन की हो बात तो... Read more