गीतिका

*गीतिका *

देश हित के लिए खेलती बेटियाँ
हर कदम पर यहाँ जीतती बेटियाँ

देखिये देश में अब पदक ला रहीं
बढ़ धरा से गगन चूमती बेटियाँ

आन को मान को देश की शान को
हर मुसीबत से हैं जूझती बेटियाँ

बेटियों पर पिता को हुआ नाज़ अब
लग पिता के गले झूलती बेटियाँ

खूबसूरत सुमन सी लगे हैं सदा
बन के खुशबू यहाँ महकती बेटियाँ

घर चलो लौट कर तुम न देरी करो
राह में बस यही सोचती बेटियाँ

आप ‘संजय’ सदा नेह देना इन्हें
हाथ सर पर सदा माँगती बेटियाँ

संजय कुमार गिरि
करतार नगर दिल्ली -53
9871021856

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "बेटियाँ"

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