गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना आ गया

गीतिका/ ग़ज़ल- देखिये कैसा जमाना आ गया
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देखिये कैसा जमाना आ गया
हर किसी को दिल दुखाना आ गया
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था वहाँ मैं मौत की आगोश में
उनको’ लेकिन मुस्कुराना आ गया
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मुझको’ तेरी बस इसी तस्वीर से
आजकल है दिल लगाना आ गया
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हर किसी को है पड़ी अपनी मगर
और पर आँसू बहाना आ गया
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आ गया शमशान के नजदीक मैं
यूँ लगा जैसे ठिकाना आ गया
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मैं चला ‘आकाश’ रब को ढूंढने
पर किसी के काम आना आ गया

– आकाश महेशपुरी

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