गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

गीतिका /गजल

आजादी तुम्हे जो मिली उसको न गँवाना
जो तोड़ने की बात करे उसको मनाना |

काश्मीर से दक्षिण कभी कोई न अजाना
मिलकर सभी इस देश में अब जश्न मनाना |

कुछ लोग हवा देते विभाजन बटवारा
होली या बिहू, तुम सभी त्यौहार मनाना |

अरुणाचल से कच्छ तलक भारत अपना
अफ़साने शहीदों की सुना शोक मनाना |

ए देश हमारा है, तुम्हारा है, यही सच
इसकी खुशहाली सदा मिलकर ही मनाना |

@ कालीपद ‘प्रसाद’

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स्वांत सुखाय लिख्ता हूँ |दिल के आकाश में जब भाव, भावना, विचारों के बादल गरजने लगते हैं तो कागज पर तुकांत, अतुकांत कविता ,दोहे , ग़ज़ल , मुक्तक , हाइकू,…
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