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….. गीता …

Dr. umesh chandra srivastava

Dr. umesh chandra srivastava

गीत

January 23, 2017

…. ..गीत..

हे ! पार्थ सुनो परिचय मेरा
हम में तुम में अणु कण में मैं
सर्वत्र सदा आभिनय मेरा
फूलों कलियों काँटों में मैं
सौरभ पराग मधुपों में मैं
सुख- दुःख के निज विषयों में मैं
लय- प्रलय धरा अम्बर में मैं
उस युग में था इस युग में हूँ
मैं युगों रहूँ निश्चय मेरा
ऋतु समय चक्र का क्रम भी मैं
अवनति उन्नति उपक्रम भी मैं
राधा- मोहन दोनों ही मैं
सारे जग का सत्क्रम भी मैं
पीयूष गरल विषधर भी मैं
क्यों मन में हो संशय मेरा
मैं आदि – अंत अक्षय अगम्य
अति सूक्ष्म रूप संसार भी मैं
मैं महाकाल का शंख- नाद
तद्आत्म रूप विस्तार भी मैं
मैं चिर- परिचित वह ब्रह्म-नाद
जड़- चेतन में संचय मेरा
मैं पंचभूत में भौतिकता
चिर- अचराचर में चेतनता
विद्युत अणु में हूँ शक्ति- पुंज
मैं निखिल विश्व की चंचलता
अण्डज पिण्डज स्वेदज में मैं
कण- कण से है परिणय मेरा
मैं परम विज्ञ अस्तित्व जगत
मैं जन्म- मृत्यु जीवन का क्रम
मैं अटल अभय निश्छल निःशंक
मैं मायापति मन का संयम
मैं निराकार साकार ब्रह्म
सब मुझमें हो निर्णय मेरा

डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखन ऊ

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Author
Dr. umesh chandra srivastava
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India
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