+++ गीत/बेवफा +++

गीत —
[[[बेवफ़ा]]]

जी करता है जी भर कोसूँ ,,
मैं अब तो उस कुदरत को ||
गिरगिट की तरह क्यूँ रब ने,,
बनाया हुस्न की फितरत को ||

( १ )
पल में वफ़ा तो पल में जफ़ा,,
तेरा रंग ना समझ पाया कोई ||
तू फ़रेबी, क़ातिल-ओ-मतलबी,
तेरा राज़ ना जान पाया कोई ||
तुमसे जो करेगा मोहब्बत वो
नापाक किया है हसरत को —-

( २ )
क्यूँ ज़िंदगी की तरह तेरी ज़िंदगी है !?
क्यूँ दु:ख-सुख की तरह तेरी बानगी है !?
तू दवा देती है तो क्यूँ ज़हर बन जाता,,
क्यूँ धूप-छाँव की तरह तेरी ज़िंदगी है !?
तेरा दिल जो लिया किसी ने वो
पाल लिया कोई मुसीबत को —–

( ३ )
पल में तोला तो पल में माशा,,
तेरा भेद ना जान पाया कोई ||
तुझसे मिले आशा कभी निराशा,
तेरा भाव पहचान ना पाया कोई ||
दिल ले के पलट वार करती तू
ना जाने कोई तेरी फ़ितरत को —–

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दिनेश एल० “जैहिंद”
27. 01. 2017

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