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गाए

हिन्दू धर्म में गाए हमारी माता होती है। गाए माता होने के साथ साथ घरेलू जानवर भी है। गाए का पौस्टिक दूध हमें स्वस्थ रखता है। गाए का पेशाब पीने से देह में सभी प्रकार की पीरा दूर हो जाती है। गाए का गोबर किसी घाव पर लगाने से वो घाव जल्द ही भर जाता है। गाए का गोबर इतना शुद्ध माना जाता है की लोग उसे पूजा में इस्तेमाल करते है। वैसे आपने ये सब बाते तो पहले भी सुनी होगी। मगर अब मैं आप सभी को कुछ अलग बताने जा रही हूँ। गाए के खूर से अगर किसी व्यक्ति पर धुल लग जाता है तो वो गंगा स्नान कर लेता है। गाए का शुद्ध घी जलाने से उसमे से एक टन ऑक्सीजन प्राप्त होता है। तो ये हवा को शुद्ध करने का बिलकुल सरल उपाय है। धार्मिक ग्रंथों में लिखा है “गावो विश्वस्य मातर:” अर्थात गाय विश्व की माता है। गौ माता की रीढ़ की हड्डी में सूर्य नाड़ी एवं केतुनाड़ी साथ हुआ करती है, गौमाता जब धुप में निकलती है तो सूर्य का प्रकाश गौमाता की रीढ़ हड्डी पर पड़ने से घर्षण द्धारा केरोटिन नाम का पदार्थ बनता है जिसे स्वर्णक्षार कहते हैं। यह पदार्थ नीचे आकर दूध में मिलकर उसे हल्का पीला बनाता है। इसी कारण गाय का दूध हल्का पीला नजर आता है। इसे पीने से बुद्धि का तीव्र विकास होता है। जब हम किसी अत्यंत अनिवार्य कार्य से बाहर जा रहे हों और सामने गाय माता के इस प्रकार दर्शन हो की वह अपने बछड़े या बछिया को दूध पिला रही हो तो हमें समझ जाना चाहिए की जिस काम के लिए हम निकले हैं वह कार्य अब निश्चित ही पूर्ण होगा। गाए के खूर के दर्शन करने से अकाल मृत्यु नहीं होती है। मानना है की गौ माता के शरीर में सभी ईश्वर का वास होता है। गाए हमें देती बहुत कुछ है मगर मनुष्य अब उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहा है। गाये से भरपूर दूध प्राप्त करने के लिए मनुष्य उन्हें इंजेक्शन दे कर दूध प्राप्त करता है। इस वजह से गाए कमज़ोर हो जाती है। इंजेक्शन लगे दूध को पीकर हमारा देह भी कमज़ोर हो जाता है क्योंकि दूध में रसायन मिल जाता है। जब गाए बुजुर्ग होकर दूध देना बंद कर देती है तब उन्हें मरने से पहले ही मार दिया जाता है। उनकी चर्बी निकाल कर सामान बनाये जाते है और उनके मांस को विदेश में बेच दिया जाता है।दुःख इस बात का भी होता है कि लोग गाय को आवारा भटकने के लिए बाजारों में छोड़ देते है। उन्हें इनके भूख प्यास की कोई चिंता ही नहीं होती। आज भी कई घरों में गाय की रोटी रखी जाती है। कई स्थानों पर संस्थाएं गौशाला बनाकर पुनीत कार्य कर रहे है, जो कि प्रशंसनीय कार्य है। साथ ही यांत्रिक कत्लखानों को बंद करने का आंदोलन, मांस निर्यात नीति का पुरजोर विरोध एवं गौ रक्षा पालन संवर्धन हेतु सामाजिक धार्मिक संस्थाएं एवं सेवा भावी लोग लगातार संघर्षरत है। गाय हमारी माता है एवं गौ रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है।

-वेधा सिंह

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