गांव की पहली " TV "

आज गांव के हर गलियों में सन्नाटा पसरा था, रोज बड़ी चहल पहल रहती थी, कहीं बच्चे कंचे खेलते हुए, कहीं गिल्ली डंडा तो कहीं लड़कियों का झुंड लुक्का छिपी तो कहीं कब्बडी खेलती हुई नजर आती थी। आज जैसे ही मैं दोपहर बाद सो कर जगा तो पूरा सन्नाटा, थोड़ा आगे बढ़ा तो दूर गली के एक नुक्कड़ पर एक बुजुर्ग बैठे मिले मै जल्दी से वहां पहुंचा और पूछा~ काका! आज ई गली में ऐतना सन्नाटा काहे है। मुंह से खैनी थूकते हुए उन्होंने कहा- आा तोरा नाही पता आज सरपंच साहेब के घरे वीसीआर लग रहा है। आज सनिमा होई। सब वही जुटल है। ठीक है काका हम भी वही जा रहे हैं- काका को बोल के मै भी चल पड़ा सरपंच साहेब के घर के ओर, मुझे अब दूर से ही लोगो की भीड़ नजर आ रही थी बच्चे उछल कूद मचा रहे थे तो बड़े भी इधर उधर चहल कदमी कर रहे थे। नजदीक पहुंचा तो एक भाई साहेब पूछ बैठे ~ अरे बाऊआ तू तो शहर में रहते हो तोरा तो पता होई की ई ससुरा सनीमा का होत है। भईया एगो चार कोना के डिब्बा जैसा एक काला सा होता है और आगे से शीशा लगा होता है अाऊर उ में फोटो दिखत है गाना भी बजत है – समझाने के अंदाज में हमने बोला। वो बोल पड़े ~ अरे उ रेउडिया ( रेडियो) जैसा का हो।
हां सही समझे बाकी उसमे खाली गाता है न, इसमें गाने वाले का फोटो भी दिखता है। अच्छा जे बात – खुश होते हुए बोले तब त हम जरूर देखब , हमरा इहे आज तक समझ ना आया की रेडियो में गावत के रहे, आज भेटाई। हां भैया जरुर कह के मैं आगे बढ़ा तो देखा कुछ लोग टीवी को उठा कर ला रहे थे और एक पुराने टेबल का जुगाड किया गया था, एक छोटा सा स्पीकर रखा था ट्रेक्टर वाला ताकि सबको आवाज सुनाई दे सके अच्छे से। बच्चे पहले से ही बोरा, चादर बिछा कर जगह लूट चुके थे। धीरे धीरे रात बढ़ने लगी और लोग खाना खा पीकर पहुंचे, और अपने अपने जगह लेकर बैठ गए शांति से।एक खाट सरपंच साहेब के लिए लगाया गया था। अपने घर पर इतने लोगो का जुटान देखकर वो अंदर ही अंदर खुश हो रहे थे। मुछ पर ताव देते हुए अन्दर से निकले और अपने खाट पर बैठ गए। बोले- अरे करमु तनी लगाव त एगो निमन सानिमा रे। ओर उसने फिल्म लगा दी ‘ नदिया के पार ‘ और सब लोग देखने लगे।अच्मभित होकर। अरे ई कैसे हो सकता है। ई त बोलत है नचत है आरे खेलावन ई गावत भी है हो।
तभी एक कड़कती आवाज आती। अरे सारे देखेला हव त देख हल्ला मत कर ना त बंद करवा देंगे। ई आवाज सरपंच साहेब का था। आवाज सुनते ही सब चुप चाप देखने लगे……..!!!!

…..राणा…..

1 Like · 26 Views
हम लेखक तो मनमौजी हैं पर फूल और अंगार दोनों लिखने की कुव्वत रखते हैं।
You may also like: