गृहस्थी (कहानी)

गांव में रचना मसाला पापड़ एवं सिलाई केंद्र चलाती थी । पति जाने के बाद अकेली हो गयी वो उसके दोनों बेटे शहर में नौकरी करके अपने परिवार का गुजारा करते । रचना ने हिम्मत न हार, सरकार से की लोन की गुहार ,गांव की महिलाओं को बनाया अपना परिवार और गांव की परंपरा-संस्कृति का तहेदिल से स्वागत करते हुए शुरू किया स्वयं का व्यवसाय, जीविका का चल निकला उपाय ।

वक्त गुजरने के साथ शहर में बढ़ती मंहगाई के कारण बेटों के परिवार का गुजारा नहीं हो पाने के कारण बहुओं ने भी सासुमां को मदद करने की ठानी । आखिर में गांव की परंपरा और संस्कृति ही गृहस्थी में रंग लाई ।

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 2 Comment 0
Views 8

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share