कविता · Reading time: 1 minute

गाँँधी ‘मूल्य’ हो गए

चोट सी लगती है सीने में
कि बस वो कागजी हो गए
अहिंसा के पैगंबर
गांधी जी कहीं खो गए

अब बची कूटनीति है
कि स्वच्छ भारत की गीति है
फर्ज जनता ने भुला दिया
फायदा नेता ने उठा लिया
गांधीजी तेरे विचार
राजनीति के शिकार हो गए
अहिंसा के पैगंबर गांधी जी कहीं खो गए

गांधी नाम की राजनीति
गांधी दाम की राजनीति है भाई
क्या था गांधी का सपना
और हम क्या हो गए
गांधीजी के मूल्य खो गए
अब बस गांधी मूल्य हो गए

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