.
Skip to content

ग़म के फ़साने सुनाले मुझको

बबीता अग्रवाल #कँवल

बबीता अग्रवाल #कँवल

गज़ल/गीतिका

November 7, 2016

जो भी करने हैं कर दर्द के हवाले मुझको
कौन है आज यहाँ जो कि सम्भाले मुझको

माँ के दर जो बढ़ने लगे है कदम मेरे
फूल लगते हैं मेरे पांव के छाले मुझको

शब्दों को हमने पिरोया है तेरे नाम से ही
गुनगुना , और तरन्नुम से भी गाले मुझको

भर दूंगी दामन खुशियों से तुम्हारा मै
जिंदगी में तेरी अपना बनाले मुझको

छोड़कर ना जाऊंगी ये आंगन तुम्हारा मैं
चाहे जितना भी ऐ यार सताले मुझको

दर्द दिल में क्यों छुपाकर जीए जा रही हो
गम के फ़साने कँवल खुल के सुनाले मुझको

बबीता अग्रवाल #कँवल

Author
बबीता अग्रवाल #कँवल
जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)
Recommended Posts
मुक्तक
तेरा ख्याल मुझको रुलाने आ गया है! तेरा ख्याल मुझको सताने आ गया है! मांगा था तकदीर से मंजिल को लेकिन, तेरा दर्द मुझको तड़पाने... Read more
हासिल क्या ?
हासिल क्या ? ---------------- मेरे त्याग और बलिदान से हासिल क्या ? हुआ मुझको !! कभी मिली दुत्कार मुझे ! तो कभी मिला कुआँ मुझको... Read more
अपना के मुझको, ठुकरा ना देना
अपना के मुझको,ठुकरा ना देना| हँसाके के मुझको ,रुला तू ना देना|| दुनिया को मेरा,पता तू ना देना| मेरे प्यार को यूँ, भुला तू ना... Read more
मोहब्बत कैसे की जाती है....
????? मोहब्बत कैसे की जाती है, कोई बता दे मुझको । मैं उड़ता परिन्दा हूँ, कोई कैदी बना दे मुझको । इश्क क्या चीज है,... Read more