23.7k Members 50k Posts
Coming Soon: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता

ग़ज़ल

“आज़मा कर देखना”

याद में मेरी कभी ख़ुद को भुलाकर देखना।
ख़्वाब आँखों ने बुने उनको चुराकर देखना।

गीत होठों के सभी क्यों आज बेगाने हुए
रख भरम में आप हमको गुनगुनाकर देखना।

फ़ासले चाहे न थे तुम दूर हमसे क्यों हुए
ज़िंदगी की इस सज़ा को तुम मिटाकर देखना।

बारिशों की बूँद में सिमटा हुआ सब दर्द है
हो सके तो रूह से अपनी लगाकर देखना।

आँख में सावन बसाकर ज़ख्म सारे पी गए
बेवफ़ा -ए-यार तू हमको रुलाकर देखना।

रूँठ जाने की अदा सीखी कहाँ से आपने
जान हाज़िर है मुहब्बत को मनाकर देखना।

हौसले उम्मीद के ‘रजनी’ सलामत हैं अभी
आज़मानी है महब्बत दिल जलाकर देखना।

डॉ. रजनी अग्रवाल ‘वाग्देवी रत्ना’
वाराणसी(उ. प्र.)
संपादिका- साहित्य धरोहर

1 Like · 3 Views
डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना'
डॉ. रजनी अग्रवाल 'वाग्देवी रत्ना'
महमूरगंज, वाराणसी (उ. प्र.)
479 Posts · 43.4k Views
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका।...
You may also like: