ग़ज़ल

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दिल ने मेरे , तेरे दिल को पैग़ाम भेजा है ।
नज़रों ने मेरी , तेरी नज़रों को सलाम भेजा है ।
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उल्फ़त उलझी हुई सी इक डोर है माना , मगर ,
मोहब्बत में लिपटा हुआ तुझे अपना नाम भेजा है ।
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मैं हर्फ़ हर्फ़ बयां करती हूँ अपने ज़ज़्बातों को ,
देख दिल का हाल , तुझे सरेआम भेजा है ।
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पिघलती शम्मा सी गुज़री , इश्क़ में ज़िंदगानी मेरी ,
अरमानों में सहेज़कर ये क़लाम भेजा है ।

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पलकों में पिरोया है तेरे हसीन ख़्वाबों को ,
“निधि” ने देख…प्रिय , किस तरह तुझे ईनाम भेजा है ।
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— ✒निधि भार्गव °

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