ग़ज़ल

चलते -चलते जिन्दगी ठहर गई
धुंध भरे रास्ते थे जहां भी नज़र गई

जो जहां है सकते के आलम में है
जब कोरोना होने की ख़बर गयी

अभी ख़ुदा का शुक्र ही कर रहे थे
कि सर पर रखी ताज उतर गई

आंचल फैलाये तेरे दरबार में रब
करम कर जाने कितनी पहर गई

नूरफातिमा खातून “नूरी”
३०/३/२०२०

1 Like · 4 Comments · 28 Views
नूरफातिमा खातून" नूरी" सहायक अध्यापिका प्राथमिक विद्यालय हाता-3 ब्लाक-तमकुही जिला-कुशीनगर उत्तर प्रदेश पिता का नाम-श्रीअख्तर...
You may also like: