ग़ज़ल

ज़मानें ये जब भी ज़मानें न होंगे ।
तराऩें ये तब भी पुरानें न होंगे ।।
अभी से न रोको क़लम का सफ़र तुम
दिलक़श ये आगे बहानें न होंगे ।।
अगर ख़ून-ए-दिल से लिखोगे हमेशा,
कभी ख़त तुम्हारे पुरानें न होंगे ।
अभी बाँट लो तुम मुह़ब्बत की दौलत,
ख़ज़ानें ये आगे ख़ज़ानें न होंगे ।
मिला है ये जीवन भले चार दिन का,
‘ईश्वर’ ये पल भी,गँवानें न होंगे।
-ईश्वर दयाल गोस्वामी।
कवि एवं शिक्षक।

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