ग़ज़ल

रुठा है कोई अपनी जिंदगानी से
जीना चाहता है अब गुमनामी से
करता करेंगे तन्हा इस जहां में
बच गए गर लहरे सुनामी से
अजीब कैफियत होती हैं उनकी
जो गुजरते हैं ऐसे वक्ते रवानी से
लब हंसता रहता है सदा उनका
मगर दिल तरह रहता है पानी से
देश तभी तरक्की करेगा” नूरी”
जब लोग खड़े हो जज्बा तुफानी से

नूरफातिमा खातून “नूरी”
‌‌‌‌ २९/३/२०२०

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