ग़ज़ल

पक्का यकीन हो तो वहम क्या करें
शौहर गर हो नशें में बेगम क्या करें
जाते -जाते सुनामी बरपा कर गये
अब और वो जुलम क्या क्या करें
जीना तो पड़ेगा किसी भी तरह से
बहुत हो गया अब ग़म क्या करें
सुकून की हवा अब चला दे खुदा
तेरे हुक्म के बगैर चमन क्या करें
मेरा क़ौम अमन में सदा रहे” नूरी”
इससेे ज्यादा दुवा हम क्या करें

नूरफातिमा खातून” नूरी”
२८/३/२०२०

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