गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

“ग़ज़ल”

मेरे दिल को अब कोई भाता नहीं है
कोई भी तो वादा निभाता नहीं है
जरा देख आओ गरीबों के घर में
न कहना की अब कोई भूखा नहीं है
कसम है ख़ुदा की बताओ तुम्हीं,क्या
लहू से चमन मैंने सींचा नहीं है
मैं इक़ पल में बर्बाद दुश्मन को कर दूँ
मगर हिंसा बापू से सीखा नहीं है
जिये जा रहे हैं सभी शौक़ से यूँ
क़ि जैसे कभी मौत आना नहीं है
अभी तुम हो आये, न जाओ अभी तुम
अभी तुमको जी भर के देखा नहीं है
बुरा कैसे शाबान कह दूँ किसी को
क़ि मुझमें ही जब कुछ भी अच्छा नहीं है

1 Like · 87 Views
Like
86 Posts · 6.6k Views
You may also like:
Loading...