ग़ज़ल

मुझको खुलूस ने वो अता मर्तबा किया
दुश्मन ने भी अदब से मेरा तज़किरा किया

क़िरदार की बुलंदी ———-उड़ा ले गयी मुझे
जब बंद ग़र्दिशों ———ने हरिक रास्ता किया

मरने के बाद भी है मेरी ——–आँखों में चमक
ऐ इश्क़ बोल तूने ये——- क्या मोजिजा किया

फिर आ गये नज़र —-उसे दिल के तमाम दाग़
मैने जो पेश सच का ——-उसे आइना किया

पहले ही थरथराया ——-था तसव्वुर से मैं तेरे
परदा उठा के तूने——– बपा जलजला किया

काँटों को फूल जान के ——-चलना है उम्र भर
मुंसिफ़ ने मेरे हक़ ———में यही फ़ैसला किया

मरहम ने जब न ज़ख़्म पे “प्रीतम” किया असर
तेजाब ने मरज़ में मेंरे फ़ायदा किया

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती(उ०प्र०)

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