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ग़ज़ल

द्वेष-भाव के काफ़िले हैं ।
मज़बूरी में प्राण हिले हैं ।
अकिंचन की वेदना में ,
आशाओं के ग़ुल खिले हैं।
धैर्य मानव में नहीं अब ,
त्याग के ढहते किले हैं ।
जो कहेंगे सत्य, उनके ,
मौत के ही सिलसिले हैं ।
देखते हो, देख लो तुम ,
हर जग़ह शिक़वे-ग़िले हैं ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
ईश्वर दयाल गोस्वामी
सागर , मध्यप्रदेश
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02...