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ग़ज़ल :– ये नीर नहीं इन आँखों के !!

Anuj Tiwari

Anuj Tiwari "इन्दवार"

गज़ल/गीतिका

June 12, 2016

ग़ज़ल –: ये नीर नही इन आखों के !!
:– अनुज तिवारी “इन्दवार”

हम डूब रहे मझधारे पर मुश्किल से भरे किनारे है !
ये नीर नही हैं आखों के ये तो गिरते अन्गारे हैं !!

हँस कर पार किये थे हम बडे-बडे तूफानो को !
अपनो ने जख्मी किये हर लम्हे यहां गवारे हैं!!

आज भँवर मे फसे-फसे हम चीख रहे चिल्ला रहे !
बचना शायद मुश्किल होगा ये नफरत के गलियारे है !!

समझ रहे थे जैसे सावन शीतल निर्मल मनभावन !
ये तपती तेज दुपहरी मे ज्वाला की बौछारें है !!

नातों के नाजुक ये बंधन ढह ना जाये ठोकर से !
जरा सम्हल कर रहना तुम ये सीसे की दीवारे हैं !!

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Author
Anuj Tiwari
नाम - अनुज तिवारी "इन्दवार" पता - इंदवार , उमरिया : मध्य-प्रदेश लेखन--- ग़ज़ल , गीत ,नवगीत ,कविता , हाइकु ,कव्वाली , तेवारी आदि चेतना मध्य-प्रदेश द्वारा चेतना सम्मान (20 फरवरी 2016) शिक्षण -- मेकेनिकल इन्जीनियरिंग व्यवसाय -- नौकरी प्रकाशित... Read more
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