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ग़ज़ल: मज़ा आ गया ।

दिनेश एल०

दिनेश एल० "जैहिंद"

गज़ल/गीतिका

November 12, 2017

ग़ज़ल: मज़ा आ गया
// दिनेश एल० “जैहिंद”

ग़म जहाँ से छिपाया मज़ा आ गया,
गीत खुशी_का गाया मज़ा आ गया ।

खुद रोया_और लोगों को हँसाया,
दर्द कौन जान पाया मज़ा आ गया ।

निशां ना बाक़ी था किसी धोक़े का,
मिरा चेहरा मुस्काया मज़ा आ गया ।

“जैहिंद” का किस्सा सबसे जुदा है,
सुर्खियों में ना आया मज़ा आ गया ।

==============
दिनेश एल० “जैहिंद”
13. 06. 2017

Author
दिनेश एल०
मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का... Read more
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