ग़ज़ल : .......... मचल मत जाना !

_______ मचल मत जाना !
@ दिनेश एल० “जैहिंद”

21 22 11 22 22

देख गुल कोई मचल मत जाना,
समझ रख संग बहल मत जाना ।

इश्क़ में….कुर्बां…..लैला मजनूँ,
सुन कहानी तू दहल मत जाना ।

राह में ढेरों हैं… फिसलन नादां,
देख सम्भल तू फिसल मत जाना ।

इल्म की सीमा में.. रह कर चल,
पार हद के तू निकल मत जाना ।

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दिनेश एल० “जैहिंद”
18. 09. 2017

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