ग़ज़ल :-- दुनियाँ बसाओं तो तुम्हें जानें !!

ग़ज़ल :– दुनियाँ बसाओ तो तुम्हे जानें !!
अनुज तिवारी “इन्दवार”

मेरे अरमान के गुलशन सजाओ तो तुम्हे जानें !
बेशक प्यार की रस्में निभाओ तो तुम्हें जानें !!

यहाँ बर्बाद हो कर भी मेरे अहसास जिंदा हैं !
मेरे अहसास की दुनियाँ बसाओ तो तुम्हें जानें !!

ज़रूरत है तुम्हें मेरी मुझको भी ज़रूरत है !
ज़माना छोड़ कर मेरे पास आओ तो तुम्हें जानें !!

तुम्हारे प्यार की बातें हमें हरदम लुभाती हैं !
ज़रा हमदम हमें अपना बनाओ तो तुम्हें जाने !!

चहरे पे छिपे चहरे यहाँ अक्सर रूलाते हैं !
चहरे से ज़रा घूंघट हटाओ तो तुम्हें जानें !!

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 132

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share