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ग़ज़ल- दिल ये तेरा दास है अबतक

आकाश महेशपुरी

आकाश महेशपुरी

गज़ल/गीतिका

September 19, 2016

ग़ज़ल- दिल ये तेरा दास है अबतक
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तू बहुत हैै दूर लेकिन पास है अबतक
सच कहूँ तो दिल ये तेरा दास है अबतक

ऐसे आँखों से पिलाया ज़ाम ऐ साक़ी
रोज पीता हूँ मगर वो प्यास है अबतक

तू कहे तो भस्म मलना छोड़ दूँगा मैं
तेरे ही खातिर लिया सन्यास है अबतक

कैसे तेरी उस गली को भूल पाऊँगा
जिस गली जिन्दा हमारी आस है अबतक

तू मिले तो शूल भी ये फूल जैसा हो
बिन तेरे मखमल भी जैसे घास है अबतक

हैं हजारों चाहने वाले मगर फिर भी
जिन्दगी मेरे लिए तू खास है अबतक

क्या कहूँ ‘आकाश’ मैंने क्या नहीं पाया
प्यार को तेरे मगर उपवास है अबतक

– आकाश महेशपुरी

Author
आकाश महेशपुरी
पूरा नाम- वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी" जन्म- 20-04-1980 पेशा- शिक्षक रुचि- काव्य लेखन पता- ग्राम- महेशपुर, पोस्ट- कुबेरस्थान, जनपद- कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)
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