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गले लगना-गले मिलना-और गले पडना

बहुत पुराने साथी से भेंट क्या हुई,कि वह गले लग गयेे,
एक दुसरे का हाल पूछा,पुरानी यादौं को ताजा किया,व चल दिये,
जाते हुए फिर मिलने का वादा किया,और विदा हो गये ।
मैं सोचता रहा मित्र का गले मिलना,
और परखा उनका गले लगना,
जब दो धुरविरोधी गले मिल रहे थे,
एक बहुत आग्रह के साथ खडे होकर आह्वाहन कर रहे थे,
तो दुसरे महाशय,अनमने मन से प्रश्नवाचक मुद्रा में देख रहे थे,
जब तक वह कुछ समझते,यह गले लग गये,
वह कुछ समझे ही थे,कि यह चल दिये,
तो उन्होने इन्हे पास बुलाया,कुछ समझाया,और मुश्कराते रहे ।
पुरा वातावरण स्तब्ध सा देखता रहा,
यह अप्रत्याशित सा था,जो देखा गया,
सभी ने अच्छा सा महसूस भी किया,
पर यह भी पल दो पल भर के लिये ही रहा,
फिर एक नया दृश्य सामने आया,
जब गले मिलकर आये हुए ने नैन मटकाया,
और इसे भी सबने देखा व जाना,
फिर शुरु हो गया लडना-लडवाना, झगडना,
और जो अब तक था गले लगना,वह हो गया गले पडना।
यह यहीं पर नहीं रुकना था,
अभी तो और कुछ भी घटना था,
और वह घटा ऐसे- जैसे-
दो दुश्मनो का एक साथ हो जाना,!
क्या खूब पट. रही गजब?
राज्य सभा का चुनाव अब
चुनावों की इस बयार में,सीटें भी बराबर बंट गयी,
यह देख कर दोनो में उत्साह है उल्लास है,
किन्तु यहां सत्ता नसीं में उदासी भरी खटास है।
अब देखो ये गले न मिल कर भी गले लग गये,
तो कोई कैसे न कहे,कि यह बिना गले मिले भी गले पड गये।
गले मिलना-गले लगना,या गले पडना,
यह क्या है जी,
कुछ दिखना-कुछ कहना,या कुछ करना ।
यह खेल है साहेब-अजब-गजब सा दिखता है,
यहाँ पर सच नहीं सिर्फ झूठ ही झूठ बिकता है ।

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सामाजिक कार्यकर्ता, एवं पूर्व ॻाम प्रधान ग्राम पंचायत भरवाकाटल,सकलाना,जौनपुर,टिहरी गढ़वाल,उत्तराखंड।
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