गर माँ नही जीवन नही

जिनसे मिला ये जिंदगी, जिनसे मिला हो हर खुशी
तकलीफ का एह्सास ना, होने दिया मुझे कभी
जो दुख संकट मे साथ हो, खुशिया दिलाने के लिये
एक माँ ही जो,भुखा भी, रह जाती है बेटा के लिये
अंगुली पकड कर आंगन मे, चलना सिखाती है वो माँ
बह्ता आंसु गर आंख से, आंचल से पोछ जाती वो माँ
‘गर माँ नही जीवन नही’ यु ही नही सर्वशक्तिशालीनी
माँ बिन अनाथ बच्चा जैसे बिन बगीचा मालिनी
विनती मेरी बस आपसे, मेरे शिर पे हाथ रख दीजिये
बेटा अधम हु आपका, आशिर्बाद मुझको दीजिये
हो साथ बस तेरा मुझे, जीवन हंसी रह जायेगी
माँ साथ तेरा छुटा तो, टुअर सदा कहलायेगी॥

कवि -बसंत भगवान राय

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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