गर मर्ज़ है कोई तो दिखा क्यों नहीं लेते

गर मर्ज़ है कोई तो दिखा क्यों नहीं देते
माक़ूल हक़ीमो से दवा क्यों नहीं लेते

तुम दिल में छुपी बात बता क्यों नहीं देते
रूठे हैं अगर वो तो मना क्यों नहीं लेते

जो नोट हुए बन्द वो हो जायेंगे रद्दी
तुम इनको गरीबों में लुटा क्यों देते

किश्तों में न तड़पा कि रुकी जाए है धड़कन
इक बार में ही जान भला क्यों नहीं लेते

घुट घुट के जिए जा रहे बिस्तर पे पड़े हो
परदेश से बेटे को बुला क्यों नहीं लेते

क्यों दिल पे रखे बोझ मियां घूम रहे हो
आँखों से आंसुओं को बहा क्यों नहीं लेते

जो जिंदगी को घुन की तरह चाट रहा है
तुम उसको कँवल दिल से भुला क्यों नहीं लेते

बबीता अग्रवाल #कँवल

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