मुक्तक

गर निगाहें सुन्दर हो तो अदा मार देती है।
दिल से जो निकलती है वो सदा मार देती है।
उलझा हुआ हूँ मैं अपनी हाथ की लकीरों में –
गर तकदीर हो हाथ से जुदा मार देती है।
-लक्ष्मी सिंह

Like Comment 0
Views 25

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing