कविता · Reading time: 1 minute

गर्मी

सूर्य दहकता आग सा है,
धरती जलती तवे सी!
इस गरमी के आगे,
फेल हुए कुलर -ए.सी!
दिन के तपन के बाद
जब संध्या बेला आई!
ठंडक तन में लिपट-लिपट,
लू की तपन बुझाई!
जब निशा समय गहराया,
हवा चली फिर धीमे -धीमे!
दूर से इस नील-गगन में
चमके तारे धीमे -धीमे!!

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