गर्मी

जब गर्मी का मौसम आता है ।
मुझे गाँव मेरा याद आता है ।।

गर्मी का मौसम, खुली आजादी ।
खाने पीने की , चिंता हो आधी ।
खुले पेड़ के नीचे खेलना ,
मुझको बहुत ही भाता है ।।
जब गर्मी का मौसम ……..

खट्टे मीठे आम, न कोई दाम।
अमराई , जहां बीते सुबह शाम ।
छुट्टियां मनाने का हो जिक्र,
तब गाँव मेरा ही भाता है ।।
जब गर्मी का मौसम…….

दादा-दादी के हाथ से खाना।
नाना-नानी से मिलने जाना ।
चाचा, मामा संग धूम मचाना,
शादी में नाचना मिल जाता है।।
जब गर्मी का मौसम…….

कूलर, पंखा, ए सी की हवा।
कोल्ड ड्रिंक, जूस,हो जाए जवा।
लस्सी, दही , कुल्फी का मजा,
ठंडा सावर भी मन को भाता है ।।
जब गर्मी का मौसम …….

संतोष बरमैया ” जय “
कुरई, सिवनी, म.प्र.

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 9

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share