गर्मी

जब गर्मी का मौसम आता है ।
मुझे गाँव मेरा याद आता है ।।

गर्मी का मौसम, खुली आजादी ।
खाने पीने की , चिंता हो आधी ।
खुले पेड़ के नीचे खेलना ,
मुझको बहुत ही भाता है ।।
जब गर्मी का मौसम ……..

खट्टे मीठे आम, न कोई दाम।
अमराई , जहां बीते सुबह शाम ।
छुट्टियां मनाने का हो जिक्र,
तब गाँव मेरा ही भाता है ।।
जब गर्मी का मौसम…….

दादा-दादी के हाथ से खाना।
नाना-नानी से मिलने जाना ।
चाचा, मामा संग धूम मचाना,
शादी में नाचना मिल जाता है।।
जब गर्मी का मौसम…….

कूलर, पंखा, ए सी की हवा।
कोल्ड ड्रिंक, जूस,हो जाए जवा।
लस्सी, दही , कुल्फी का मजा,
ठंडा सावर भी मन को भाता है ।।
जब गर्मी का मौसम …….

संतोष बरमैया ” जय “
कुरई, सिवनी, म.प्र.

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