कविता · Reading time: 1 minute

गम नही

मुझे गम नही किसी के जाने का
ओर नही चाहिए सफाई कोई
गर खले कभी भी कमी मेरी
आ कर मिले मुझे उसी हक से ।
जहां बातो मे भी अपनापन था ।
हां इक कमी है मुझमे
मै पुरानी बातो को भूला देता हूॅ ।
मै खुद मे ही मस्त रहता हूॅ ।
यादे जब सताने लगे
पन्नो पर उतार देता हूॅ ।
मुझे गम नही किसी के जाने का
खुद को हर हाल मे खुश रखता हूॅ।

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