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गम खुशी के मध्य में समतल तुला रखना

एक गीत और-

गम खुशी के मध्य में समतल तुला रखना।
हो सके तो दर्द से कुछ फासला रखना।

दर्द गम सहना पड़ेगा जिंदगी है जी।
श्वांस का उपहार जबतक क्या कमी है जी।
कठपुतलियाँ हम सभी भगवान की यारों-
आज फिर यह आंँख में कैसी नमी है जी।

हर मुसीबत से निकलने की कला रखना।
हो सके तो दर्द से कुछ फासला रखना।

एक दिन जब साथियों सबको हीं’ मरना है।
मौत के इस खौफ से हमको न डरना है।
जान है जबतक रगों में रक्त बहता हो-
हार मत जाना कभी संघर्ष करना है।

ज्योति उम्मीदों भरी मन में जला रखना।
हो सके तो दर्द से कुछ फासला रखना।

राग जीवन का नहीं हरपल मधुर होता।
धूप छाया जिंदगी है यार क्यों रोता।
खार के सह पुष्प का खिलना जरा देखो-
कंटकों के बीच मधुरिम गंध कब खोता।

सूर्य निकलेगा क्षितिज पर हौसला रखना।
हो सके तो दर्द से कुछ फासला रखना।

#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य’

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