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*गम को जब से हमदम माना*

गम को जब से हमदम माना
छाया है इक समां सुहाना
माँ शारदे की कृपा बरसी
पाया है अनमोल खज़ाना
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

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धर्मेन्द्र अरोड़ा
धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर पानीपती"
पानीपत
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*काव्य-माँ शारदेय का वरदान * Awards: विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित