गमो का बोझ

गमो का बोझ जब
दिल से उठाया न गया
आंखों से अश्कों का राज़
भी छुपाया न गया ।

दर्दे दिल चाह कर भी
किसी को बताया न गया
जख्म दिया था जिसने
नाम उसका जुबां पे लाया न गया ।

रोशनी प्यार की कम थी
बुझते दीयों को जलाया न गया
कसूर शायद हमारा ही था
जो वादा हमसे निभाया न गया ।

गुजरा नही रूठा था कोई
आवाज दे के वापस बुलाया न गया
जिन्दगी रोज गुजरती रही
अहं हमसे दबाया न गया ।।

राज विग

Like Comment 0
Views 115

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share