गदहे

गदहे,
अब मुख़्यधारा में आ रहे हैं.
वे रेंकने के बजाय,
फेंकने लगे हैँ.
गदहों का भोलापन,
उनके लदे होने का यथार्थ,
अब राजनीति का
नया अध्याय होगा,
सावधान!
गदहे,
अब मुख्यधारा में आ रहे हैं.
अब उनके सपनों को
पंख लगने लगे हैँ
और
वे लोकतंत्र के मंदिर में
अपनी बौद्धिक प्रवेश की भांति,
सशरीर पहुँचने
को आतुर हो रहे हैँ,
गदहे,
अब मुख्यधारा में आ रहे हैं.

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