" गड्ढे गड्ढे हिचकोले है , सड़कें खो गई " !!

सड़क किनारे घर हैं ,
पोखर पोखर पानी !
यह विकास की गाथा ,
घर घर कहे कहानी !
सरकारी लेखे में तो है –
बातें बो गई !!

छप छप करते बच्चे ,
वाहन करे छपाक !
राजनीति को प्रणाम ,
रौब दाब और धाक !
बेचारा सा यहां प्रशासन –
आपे खो गई !!

खेती घटा मुनाफा ,
कृषक चढ़ रहे सूली !
पूंजी परदेसी है ,
यों ऊंचाई छू ली !
बैंक वसूली बढ़ती डूबत-
नीति धो गई !!

नोटबन्दी , जीएसटी ,
अब कहें सुधारबन्दी !
रोज़गार घटता सा
है उद्योगों में मंदी !
घोटाले हो रहे उजागर –
आँखें रो गई !!

बृज व्यास

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 1 Comment 1
Views 133

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share