फ़लक से चाँद किसी दिन जमीं पे लायेंगे

“गज़ल”
मतला-
जरा सा सब्र करो हम हुनर दिखायेंगे।
फलक से चाँद जमीं पे किसी दिन लायेंगे।

गुरुर कर न ए तूफान खुद पे तू इतना,
तेरी गली में भी हम इक दिया जलायेंगे।

न प्यार करते,अगर हमको ये पता होता,
वो इस तरह से मेरे दिल को आजमायेंगे।

खबर नहीं थी मुहब्बत में बेवफा हमको,
सजा ये प्यार कि हम बेवजह ही पायेंगे।

गुजर तो जाने दे उस दौर को सनम ,फिर से
मेरे भी दिल के सभी जख्म मुस्कुरायेंगे।

उसे भी दर्द का ऐहसास एक दिन होगा,
किसी के प्यार में जब वो भी चोट खायेंगे।

मक्ता-
नकार कितना भी तू पर यकीं है ये मुझको,
गज़ल विनोद की सब लोग गुनगुनायेंगे।
#विनोद

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