Skip to content

गज़ल

Neelam Sharma

Neelam Sharma

गज़ल/गीतिका

August 8, 2017

तेरी रुसवाई का अंधेरा लिए, दिल मेरा
दिया सा रात भर जलता रहा है।

देख कर नापाक हरकत सरहदों पर
दिल दरिया आग बन चढ़ता रहा है।

नाज़-ए-वतन हैं,मेरी हिंद सैना
सीना ठोक, हर वीर आगे बढ़ता रहा है।

न जाने क्यों, मेरे देश की तरक्की से
चीन पाकिस्तान यूं ही बस जलता रहा है।

शांति-सब्र,मेहनत और परिश्रम का
फल सदा सबको सुनों मिलता रहा है।

कभी पतझड़ कभी सावन तो कभी बसंत में
सदा ही पुष्प उपवन में नव खिलता रहा है।

बस यूं ही नहीं है मीत मेरा, दुनिया वालों
खुद ही ज़ख्म देकर, फिर सिलता रहा है।

सूरज कब न ढला,तू ही अब बता’नीलम’
नित ढलकर सलौनी शाम से मिलता रहा है।

नीलम शर्मा

Share this:
Author
Neelam Sharma

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you