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गज़ल:-मै एक हसीन पल हूँ/मंदीप

Mandeep Kumar

Mandeep Kumar

गज़ल/गीतिका

September 27, 2016

मै एक हसीन पल हूँ/मंदीप्
दिल को छु जाऊ मै हवा का वो जोक हूँ,
मै बस जाऊ दिल में वो हसीन समा हूँ।

ना निकल सको कभी भी दिल से,
मै वो तुम्हारे ख़्यालो का खूबसूरत नजराना हूँ।

लबो पर एक बार अगर आ जाऊ,
मै वो हँसी का एक हसीन झरोखा हूँ।

महसुस जो करोगे अगर मुझ को कभी,
मै वो प्यार का गहरा समुन्दर हूँ।

रहूँ हमेसा तुम्हारे साथ हर पल,
मै वो खूबसूरत यादो का साया हूँ।

गुलाम परिन्दे को आजाद महसूस करवा दूँ,
मै प्यार का वो आलीसान तहखाना हूँ।

“मंदीप्” रहे हमेसा सब की यादो में ,बातो में,
मै कभी ना ख़त्म होने वाला प्यार का गहरा कुआँ हूँ।

मंदीपसाई

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Author
Mandeep Kumar
नाम-मंदीप कुमार जन्म-10/2/1993 रूचि-लिखने और पढ़ाने में रूचि है। sirmandeepkumarsingh@gmail.com Twitter-@sirmandeepkuma2 हर बार अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ। और रही बात हम तो अपना दर्द लिखते है।मेरा समदिल मेरे से खुश है तो मेरी रचना उस के दिल का... Read more
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