गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

गजल

मुहब्बत की सियासत और क्या है
बिना इसके हकीकत और क्या है

चलो बचके सड़क पर मनचलों से
बुजुर्गों की नसीहत और क्या है

हमेशा को नहीं रहते जवाँ सब
जवानी की हरारत और क्या है

छुपे से प्यार करना और मिलना
इसके सिवा मुहब्बत और क्या है

बगावत रोज खुद से ही करेगे
युवाओं की मुसीबत और क्या है

लगी है आग जेहन में तभी तो
सिवा तेरे मुहब्बत और क्या है

मिला है ईश का वरदान सबको
प्यार को छोड़ जन्नत और कहाँ है

जगी है प्यास पीने की हलक तक
सभी की है न हिम्मत और क्या है

जरा उन आशिकों से पूछ लेना
लुटाया खुद लगी जब लत और क्या है

जुदा वो हो गया खुद से बिछड़ के
जवानी लौं जली खत और क्या है

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