गजल

साथियों तुम बढ़ो आज रफ़्तार से।
मत डरो मत डिगो, आज की हार से।।
हार से जान लो जीत का राज क्या?
जान कर पग धरो नीति उपचार से।।
दिल बड़ा तुम रखो कम मिले भी खुशी।
हर खुशी बस खुशी जीत लो प्यार से।।
आँकना कम नहीं तुम खुदी को कभी।
तुम वही गीत धुन जो बजे तार से।।
ध्यान इतना रखो हर नजर लक्ष्य पर।
जब कदम ये बढ़े तो कलाकार से।।
मापनी का यहाँ मोल है कुछ नहीं।
लक्ष्य तो लक्ष्य , क्या भेद आकार से।।
हम चलें युग चले, राह ऐसी चुनो।
दिल करें राज हर, काज उपकार से।।
वक्त कहता अभी तुम सतत बस चलो।
चल घने जंगलों शैल या धार से।।
जो नदी है कहे बात को तू समझ।
तारिणी अब रुके है नहीं पार से।।

संतोष बरमैया #जय

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