गजल

अमन के रास्ते गीले नहीं थे
शहर के शख्स पथरीले नहीं थे

निभाते थे सभी मिलकर वफायें
यहाँ इन्सान जहरीले नहीं थे

जुबां दे दी अगर तो बात पक्की
कभी वादों के रेतीले नहीं थे

मिला करते हैं पग-पग पर उछल कर
ये धोखे तेज फुर्तीले नहीं थे

गले मिलना चहक कर बात करना
इन्हीं अादत में शर्मीले नहीं थे

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सोमनाथ शुक्ल
इलाहाबाद

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दूर से दिखती नहीं है साफ मेरी शख्सियतrnगर मुझे पहचानना हो पास आकर देखना
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