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गजल

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

गज़ल/गीतिका

June 10, 2017

दर्द के आलम में भी मुस्कुराया जा सकता है
पत्थर पर कोमल फूल खिलाया जा सकता है

लोग मुझे पत्थर दिल कह कहकर दर्द देते रहे
उन्हें क्या पता पत्थर से झरना बहाया जा सकता है

उनकी हर गलती को छोटा समझ हम टालते रहे
हमें क्या पता चिंगारी से घर जलाया जा सकता है

गर हमारी दो आत्माओं का मिलन होता साथी
तो सपनो में मिलकर काम चलाया जा सकता है

मोहबत में बफ़ाये जफाये तो साथ साथ चलती है
लेकिन ऋषभ उनकी खताओं में जिया जा सकता है

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Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है

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